यूपीआई को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों कई तरह के दावे तेजी से फैल रहे हैं। कुछ संदेशों में कहा जा रहा है कि अब दोस्तों और परिवार को पैसे भेजने, किराने का सामान खरीदने या कैब का भुगतान करने पर शुल्क देना पड़ सकता है। इन दावों के बीच MyGovIndia ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि सामान्य व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान अभी भी मुफ्त हैं।
यूपीआई भुगतान को लेकर क्या है सच्चाई?
हाल ही में Payment and Settlement Systems Act में हुए बदलाव के बाद यूपीआई शुल्क को लेकर चर्चा शुरू हुई। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह दावा फैलने लगा कि यूपीआई से पैसे भेजने पर लोगों से शुल्क लिया जाएगा। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऐसा नहीं है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजने वाले सामान्य यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।
इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त या परिवार के सदस्य को यूपीआई के जरिए पैसे भेजता है, तो उसे लेनदेन के लिए अलग से पैसा नहीं देना होगा। इसी तरह दोस्तों के बीच किसी रेस्तरां का बिल बांटना, किराया भेजना या परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेजना भी सामान्य रूप से मुफ्त रहेगा।
💳 सामान्य यूपीआई भुगतान अभी मुफ्त
- दोस्तों को पैसे: सामान्य व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान पर शुल्क नहीं
- परिवार को भुगतान: बैंक खाते में पैसे भेजना सामान्य रूप से मुफ्त
- किराने की खरीदारी: ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क की बात नहीं
- कैब भुगतान: रोजमर्रा के भुगतान पर फिलहाल कोई बदलाव नहीं
- बिल बांटना: दोस्तों के बीच सामान्य यूपीआई भुगतान मुफ्त
दुकानों और रोजमर्रा के भुगतान पर असर
दुकानों और दूसरी जगहों पर यूपीआई से भुगतान करने वाले लोगों के लिए भी फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। किराने का सामान खरीदने, कैब का किराया देने या कॉफी जैसी रोजमर्रा की चीजों के भुगतान पर ग्राहक से कोई अतिरिक्त शुल्क लेने की बात नहीं कही गई है।
MyGovIndia के अनुसार, भविष्य में अगर MDR व्यवस्था लाई जाती है तो उसका असर कुछ खास प्रकार के बड़े कारोबारी लेनदेन पर हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगना शुरू हो जाएगा। आम ग्राहकों के रोजमर्रा के भुगतान को इससे अलग रखा गया है।
📌 MDR और कानून में बदलाव का मतलब
- MDR व्यवस्था: भविष्य में कुछ बड़े कारोबारी लेनदेन पर असर हो सकता है
- आम ग्राहक: रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान को अलग रखा गया है
- कानूनी बदलाव: यह सीधे यूपीआई शुल्क लगाने का फैसला नहीं है
- भविष्य की व्यवस्था: संभावित शुल्क व्यवस्था के लिए कानूनी आधार तैयार करने वाला कदम
- सुरक्षा: साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने पर भी लगातार सुधार
कानून में बदलाव से क्या समझें?
कानून में किया गया बदलाव सीधे तौर पर यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला नहीं है। इसे भविष्य में किसी संभावित शुल्क व्यवस्था के लिए कानूनी आधार तैयार करने वाला कदम बताया गया है। सरकार का कहना है कि यूपीआई व्यवस्था को और सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। इसमें साइबर सुरक्षा मजबूत करना, नेटवर्क को बेहतर बनाना और धोखाधड़ी को रोकना भी शामिल है।
सरकार ने यह भी कहा है कि यूपीआई भारत की अपनी डिजिटल भुगतान व्यवस्था है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस व्यवस्था ने देश में डिजिटल भुगतान को काफी आसान बनाया है। अब इसका इस्तेमाल भारत के बाहर भी कई देशों में किया जा रहा है। जुलाई 2026 में यूपीआई के जरिए 2,300 करोड़ से ज्यादा लेनदेन किए गए, जिनकी कुल राशि करीब 30 लाख करोड़ रुपये रही।
वायरल संदेशों पर क्यों नहीं करें भरोसा?
इसलिए सोशल मीडिया पर आने वाले ऐसे संदेशों को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। अगर कोई संदेश यह दावा करता है कि यूपीआई से दोस्तों को पैसे भेजने या रोजमर्रा की खरीदारी करने पर तुरंत शुल्क लगने वाला है, तो उसे बिना जांचे सही नहीं मानना चाहिए।
फिलहाल आम लोगों के लिए यूपीआई भुगतान पहले की तरह मुफ्त है। हालांकि, भविष्य में किसी खास तरह के बड़े कारोबारी भुगतान पर कोई नई व्यवस्था लागू होती है या नहीं, इस पर सरकारी घोषणा का इंतजार करना चाहिए। उपयोगकर्ताओं को किसी भी वायरल संदेश के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना बेहतर रहेगा।
इस खबर में जरूरी रूप से इस्तेमाल किए गए पांच English शब्द हैं: UPI, MDR, Payment, Digital और Cyber।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण पर आधारित है। किसी भी भुगतान से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूर करें।

