US economy को लेकर शेयर बाजार में काफी उम्मीद दिखाई दे रही है। बाजार को लगता है कि आर्थिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और कंपनियों की कमाई मजबूत बनी हुई है। लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि रोजगार के अवसर भी उसी गति से बढ़ेंगे। आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के बढ़ने और नौकरियों के कम होने की स्थिति एक साथ दिखाई दे सकती है।
US economy की तेज growth के बीच jobs पर सवाल
Digital Payments कंपनी स्ट्राइप के प्रमुख पैट्रिक कॉलिसन ने हाल में सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने करीब 15 लाख फॉलोअर्स से अर्थव्यवस्था को लेकर उनकी राय पूछी। करीब 13 हजार लोगों ने इस सर्वे में हिस्सा लिया। औसतन लोगों को उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में आर्थिक वृद्धि दोगुनी होकर करीब 4.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं, उन्हें रोजगार में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट की भी आशंका है।
इस सोच को artificial intelligence को लेकर आशावादी नजरिए के रूप में देखा जा सकता है। इसके अनुसार एआई अर्थव्यवस्था का उत्पादन काफी बढ़ा सकता है, लेकिन साथ ही करोड़ों लोगों के पारंपरिक काम की जरूरत भी कम हो सकती है। यानी कंपनियां अधिक सामान और सेवाएं तैयार करेंगी, लेकिन इसके लिए पहले जितने कर्मचारियों की जरूरत नहीं होगी।
कुछ समय पहले बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा तेजी ला रहे थे। अब स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। बैंक और छोटी कंपनियों के शेयर इस साल बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रमुख समूह की तुलना में ज्यादा मजबूत रहे हैं। बैंक और छोटी कंपनियां आर्थिक गतिविधियों में बदलाव के प्रति अधिक Sensitive मानी जाती हैं।
📊 US Economy और Jobs की तस्वीर
- Economic Growth: अगले पांच वर्षों में करीब 4.3 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद
- Employment: रोजगार में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट की आशंका
- Unemployment: बेरोजगारी दर 4 प्रतिशत से थोड़ी ऊपर
- Salary Growth: सालाना वेतन वृद्धि करीब 3.2 प्रतिशत
- मुख्य चिंता: आर्थिक growth और jobs के बीच बढ़ता अंतर
कंपनियों की कमाई बढ़ी, लेकिन hiring कमजोर
Deutsche बैंक के एक हालिया अध्ययन में कंपनियों की कमाई से जुड़ी बातचीत में ‘व्यापक आधार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बार-बार होने की बात सामने आई। पीएनसी फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख बिल डेमचैक ने भी कहा कि एआई का सकल घरेलू उत्पाद पर असर जरूर है, लेकिन कर्ज की मांग में बढ़ोतरी को केवल एआई से नहीं समझा जा सकता। अलग-अलग उद्योगों और क्षेत्रों में भी मांग मजबूत दिखाई दे रही है।
इससे बड़ी तस्वीर यह बनती है कि अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों में कंपनियों को अच्छी मांग मिल रही है। सिर्फ एआई से जुड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों की कंपनियां भी अच्छी आय और मुनाफा दर्ज कर रही हैं। लेकिन मजबूत कारोबार का असर नई भर्तियों पर उसी तरह नहीं दिख रहा है।
यही स्थिति अर्थव्यवस्था के उस हिस्से को सामने लाती है जहां विकास तो हो रहा है, लेकिन नौकरियां पर्याप्त संख्या में नहीं बढ़ रही हैं। पिछले सप्ताह के आंकड़ों से पता चला कि जुलाई में कुल वेतन पाने वाले कर्मचारियों की संख्या में कमी आई। पिछले 12 महीनों में यह पांचवीं बार था जब कुल रोजगार में गिरावट दर्ज हुई। निजी क्षेत्र में पिछले एक साल के दौरान हर महीने औसतन करीब 50 हजार से कुछ अधिक नई नौकरियां जुड़ीं।
बेरोजगारी दर कम, फिर भी job opportunities कमजोर
मंदी के दौर को छोड़ दिया जाए तो रोजगार में इतनी धीमी वृद्धि सामान्य नहीं मानी जाती। इसके बावजूद बेरोजगारी दर में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह दर 4 प्रतिशत से थोड़ी ऊपर बनी हुई है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि देश की कामकाजी आबादी का आकार घट रहा है। बड़ी संख्या में पुराने कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और प्रवासन की रफ्तार भी कम हुई है।
जनसंख्या से जुड़े बदलाव बेरोजगारी को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं, लेकिन कंपनियों की ओर से श्रमिकों की मांग भी कमजोर बनी हुई है। नौकरी के अवसर महामारी के बाद के निचले स्तरों के आसपास हैं। अगर कंपनियां कर्मचारियों को लेकर ज्यादा प्रतिस्पर्धा कर रही होतीं तो इसका असर वेतन पर भी दिखाई देता। लेकिन सालाना वेतन वृद्धि करीब 3.2 प्रतिशत है, जो महामारी से पहले के समय के बाद सबसे कम स्तर है।
🤖 AI Growth और Employment का अंतर
- AI का असर: उत्पादन और कंपनियों की कमाई बढ़ सकती है
- Jobs पर असर: पारंपरिक कामों की जरूरत कम हो सकती है
- Consumer Demand: बचत कम करके खर्च से मांग को सहारा
- Private Investment: डेटा सेंटर निर्माण में बड़े निवेश
- Risk: आर्थिक growth बढ़ने के बावजूद रोजगार उसी अनुपात में न बढ़े
Consumer spending और private investment से सहारा
फिलहाल कुछ ऐसे कारण भी हैं जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए हुए हैं। कमजोर Salary increment के बावजूद उपभोक्ताओं की मांग बनी हुई है। इसका एक कारण यह है कि कई परिवार अपनी बचत कम करके खर्च कर रहे हैं। इससे मांग को कुछ समय तक सहारा मिल सकता है, लेकिन लंबे समय तक बचत घटाकर खर्च जारी रखना मुश्किल होगा।
निजी निवेश भी अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है। डेटा सेंटर बनाने के लिए कंपनियां बड़ी मात्रा में कर्ज जुटा रही हैं। ऐसे निवेश के लिए अरबों डॉलर के कर्ज की जरूरत पड़ रही है। हालांकि यह प्रक्रिया भी हमेशा इसी गति से जारी रहेगी, यह जरूरी नहीं है।
फिलहाल ये दोनों सहारे अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकते हैं। अगर एआई उम्मीदों का कम से कम कुछ हिस्सा भी पूरा करता है, तो उत्पादन और कंपनियों की कमाई में तेज वृद्धि संभव है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी यह जरूरी नहीं कि रोजगार उसी अनुपात में बढ़े। आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास और रोजगार के बीच यह अंतर एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश सलाह या वित्तीय निर्णय का आधार नहीं माना जाना चाहिए।