अमेरिका में भारतीय युवक अंशुल कुंचा की हत्या, $20,000 इनाम घोषित

फिलाडेल्फिया पुलिस ने ऐसी जानकारी देने वाले को $20,000 का इनाम देने की घोषणा की है जिससे अंशुल कुंचा के हत्यारों को पकड़ा जा सके और उन्हें सज़ा दिलाई जा सके। तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी इलाके के रहने वाले 27 वर्षीय टेक प्रोफेशनल अंशुल की 5 जून की सुबह पिज़्ज़ा डिलीवरी करते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

अंशुल कुंचा हत्याकांड में इनाम की घोषणा

यह जानलेवा गोलीबारी उत्तरी फिलाडेल्फिया की एजली स्ट्रीट पर स्थित रेमंड रोसेन होम्स हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में हुई, जो आधी रात के ठीक बाद की घटना थी। फिलाडेल्फिया पुलिस के अनुसार, बिल्डिंग के एक खाली यूनिट में तीन पिज़्ज़ा बॉक्स डिलीवर करने के बाद अंशुल अपार्टमेंट के बाहर सिर में गोली लगने से घायल अवस्था में पाए गए। उन्हें टेम्पल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

घटनास्थल से मिले अहम सुराग

स्थानीय जानकारी के अनुसार, जांचकर्ताओं को घटनास्थल के पास तीन इस्तेमाल किए हुए बुलेट केसिंग मिले। केसिंग की स्थिति से पता चलता है कि गोलीबारी के समय अंशुल हमलावर या हमलावरों के बहुत करीब थे। डिलीवरी बॉक्स और बैग खाली अपार्टमेंट के अंदर मिले, जो बिना किसी छेड़छाड़ के रखे हुए थे, जबकि उनकी कार पास ही मिली जिसमें पिज़्ज़ा वार्मर अभी भी अंदर था।

हमले से ठीक पहले, फिलाडेल्फिया हाउसिंग अथॉरिटी के सर्विलांस कैमरों में अंशुल को पिज़्ज़ा बॉक्स ले जाते हुए देखा गया था। वीडियो में, उन्हें अपार्टमेंट बिल्डिंग में जाते हुए देखा जा सकता है और उनके पीछे काले कपड़ों में दो लोग हैं, जिनमें से एक ने रकसैक (बैग) ले रखा है। गोलीबारी का कोई कैमरा फुटेज नहीं मिला। चीफ इंस्पेक्टर स्कॉट स्मॉल ने स्थानीय मीडिया को बताया कि चल रही जांच के हिस्से के तौर पर अधिकारी पिज़्ज़ा रेस्तरां के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

जांच में फोन नंबर बना अहम कड़ी

पुलिस ने डिलीवरी ऑर्डर के लिए इस्तेमाल किए गए फ़ोन नंबर का पता लगा लिया है और वे इसे एक अहम सुराग मान रहे हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कॉलर का पीड़ित के साथ कोई पुराना संबंध तो नहीं था। चूंकि अंशुल का कोई भी सामान नहीं लिया गया था, इसलिए अधिकारियों को शक है कि डिलीवरी का अनुरोध उन्हें उस जगह पर बुलाने के लिए पहले से सोची-समझी चाल थी।

परिवार कर रहा पार्थिव शरीर का इंतजार

हैदराबाद में अंशुल का परिवार उनके पार्थिव शरीर के वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है। उनकी बहन तन्वी के अनुसार, वे अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका गए थे और ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी से बिज़नेस एनालिटिक्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। एक ग्लोबल कंपनी में फुल-टाइम नौकरी मिलने के बाद भी, वे अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए वीकेंड पर एक पिज़्ज़ेरिया में पार्ट-टाइम काम कर रहे थे। चार साल से ज़्यादा समय से अमेरिका में रह रहे अंशुल मूल रूप से मेडचल-मलकजगिरी इलाके के गुंडलापोचमपल्ली के रहने वाले थे।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। जांच जारी है और आधिकारिक निष्कर्ष आने तक तथ्यों में बदलाव संभव है।

Gourav Kumar Singh

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