कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त देखने को मिली है। सोमवार को दोनों प्रमुख तेल मानकों की कीमत में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई थी। इसके बाद मंगलवार को भी बाजार में मजबूती बनी रही। ब्रेंट कच्चा तेल करीब 87.81 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत करीब 82.20 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।

अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने नई मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा है कि संघर्ष में मारे गए लोगों के लिए ईरान को मुआवजा देना होगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में होने वाली बातचीत में इन मांगों को मजबूती से शामिल किया जाएगा।

इन नई शर्तों से दोनों देशों के बीच जल्द समझौते की उम्मीदों को झटका लग सकता है। बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की खेप इसी रास्ते से गुजरती थी। फिलहाल यहां से जहाजों की आवाजाही काफी सीमित बनी हुई है।

🛢️ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

  • ब्रेंट कच्चा तेल: करीब 87.81 डॉलर प्रति बैरल
  • अमेरिकी डब्ल्यूटीआई: करीब 82.20 डॉलर प्रति बैरल
  • लगातार तेजी: चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त
  • सोमवार की तेजी: दोनों प्रमुख तेल मानकों में 5 प्रतिशत से ज्यादा
  • मुख्य कारण: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता

ईरान और ओमान के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को फिर से खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को अपनी नाकाबंदी हटानी होगी और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी। दूसरी ओर ट्रंप ने कहा है कि बातचीत के दौरान ईरान को मुआवजा देने की बात पहले नहीं उठाई गई थी।

हालांकि जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन में युद्ध के बाद ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर का कोष बनाने की योजना का उल्लेख किया गया था। इसमें अमेरिका और क्षेत्र के कुछ अन्य देशों की भागीदारी की बात कही गई थी। इसी कारण दोनों देशों के बीच बातचीत और आगे की दिशा को लेकर बाजार में कई तरह की आशंकाएं बनी हुई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने पर टिकी बाजार की नजर

तेल बाजार में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य आवाजाही कब शुरू होगी। अगर इस रास्ते पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने की संभावना बन सकती है। वहीं अगर अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता होता है और समुद्री रास्ता फिर से खुलता है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने रविवार को संकेत दिया था कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए तुरंत नए सैन्य हमले करने के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के पक्ष में हैं। इस बयान के बाद भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक अब दोनों देशों की बातचीत और समुद्री रास्ते से तेल की आपूर्ति पर नजर रख रहे हैं।

🇮🇳 भारत पर कच्चे तेल की तेजी का असर

  • ईंधन लागत: कच्चा तेल महंगा होने से बढ़ सकती है
  • परिवहन खर्च: लंबे समय तक कीमत बढ़ने पर असर पड़ सकता है
  • महंगाई: तेल महंगा रहने से दबाव बढ़ सकता है
  • आयात: भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर असर
  • आगे की दिशा: अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज की स्थिति अहम

Crude Oil की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो इसका असर ईंधन की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर निर्भर करेगी।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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