West Asia में लंबे समय से चल रहे युद्ध के कारण पुराने व्यापार मार्गों में रुकावट आने के बाद भारत ने Urea की खरीद के लिए नए देशों का रुख किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत ने मिस्र, अल्जीरिया, नाइजीरिया और जॉर्जिया से बड़ी मात्रा में यूरिया मंगाया। इस अवधि में भारत द्वारा आयात किए गए कुल 25 लाख टन यूरिया में से 52 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं चार देशों से आया।
भारत ने यूरिया खरीद के लिए नए देशों का रुख किया
आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में मिस्र से सबसे ज्यादा करीब 6.09 लाख टन यूरिया आया। इसके बाद अल्जीरिया से 2.45 लाख टन, नाइजीरिया से 2.44 लाख टन और जॉर्जिया से करीब 2.11 लाख टन यूरिया मंगाया गया।
सरकार ने ओमान, मलेशिया, रूस, तुर्किये और वियतनाम से भी यूरिया की आपूर्ति की व्यवस्था की है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण जहाजों के रास्ते, माल ढुलाई की लागत और आपूर्ति के समय को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में भारत ने एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए खरीद के स्रोत बढ़ाए हैं।
भारत दुनिया में उर्वरक का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और यूरिया का सबसे बड़ा आयातक है। देश में यूरिया के अलावा डीएपी, पोटाश और अन्य मिश्रित उर्वरकों की भी जरूरत होती है। खेती में यूरिया का खास महत्व है क्योंकि इसमें 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है और यह Rice तथा Wheat जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद करता है।
🌾 भारत की यूरिया खरीद का आंकड़ा
- कुल आयात: 25 लाख टन यूरिया
- चार देशों की हिस्सेदारी: 52 प्रतिशत
- मिस्र से आयात: करीब 6.09 लाख टन
- अल्जीरिया से आयात: 2.45 लाख टन
- नाइजीरिया से आयात: 2.44 लाख टन
- जॉर्जिया से आयात: करीब 2.11 लाख टन
पिछले वित्त वर्ष में भी भारत ने इन देशों से यूरिया खरीदा था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में मिस्र से करीब 1.95 लाख टन, अल्जीरिया से 2.17 लाख टन, जॉर्जिया से 1.24 लाख टन और Nigeria से करीब 4.47 लाख टन यूरिया आयात किया गया। इन चार देशों से हुई खरीद उस वर्ष भारत के कुल 112 लाख टन यूरिया आयात का करीब 8.8 प्रतिशत थी।
यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ रहा है। 45 किलो की यूरिया बोरी की कीमत करीब 2,900 रुपये से बढ़कर 4,300 रुपये तक पहुंचने के बीच उर्वरक मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में सब्सिडी का अनुमान बढ़ाकर करीब 3.54 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। बजट में इसके लिए पहले 1.77 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। पिछले वित्त वर्ष में यह खर्च 2.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।
यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर जोर
सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता farmers को युद्ध के असर से बचाना और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग देशों से खरीद करना भविष्य में जोखिम कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके साथ देश में यूरिया का उत्पादन बढ़ाना भी जरूरी है। भारत में इस समय अलग-अलग क्षेत्रों में 33 यूरिया कारखाने चल रहे हैं और उनकी कुल उत्पादन क्षमता करीब 2.69 करोड़ टन है। इसके बावजूद देश अपनी सालाना जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत यूरिया आयात करता है।
🚜 यूरिया उत्पादन और मांग की स्थिति
- यूरिया कारखाने: 33
- कुल उत्पादन क्षमता: करीब 2.69 करोड़ टन
- आयात पर निर्भरता: सालाना जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत
- खरीफ उर्वरक जरूरत: 3.839 करोड़ टन से घटकर 3.805 करोड़ टन
- यूरिया मांग: करीब 1.9 करोड़ टन
- मुख्य चुनौती: समय पर वितरण और परिवहन
कम बारिश की संभावना का असर भी उर्वरक की मांग पर पड़ा है। मौसम विभाग द्वारा 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 90 प्रतिशत किए जाने के बाद खरीफ फसल के लिए उर्वरक की अनुमानित जरूरत कम की गई है। कुल जरूरत का अनुमान 3.839 करोड़ टन से घटाकर 3.805 करोड़ टन किया गया है। यूरिया की मांग करीब 4 लाख टन घटाकर 1.9 करोड़ टन कर दी गई है, जबकि डीएपी की अनुमानित मांग भी कम की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए देशों से यूरिया खरीदने की रणनीति भारत को Geopolitical और आपूर्ति संबंधी जोखिमों से बचाने में मदद कर सकती है। हालांकि, केवल यूरिया उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। किसानों तक समय पर इसकी पहुंच, सही वितरण और परिवहन व्यवस्था भी जरूरी है। किसी क्षेत्र में पर्याप्त यूरिया होने के बावजूद वितरण या परिवहन की समस्या के कारण किसानों को स्थानीय स्तर पर कमी का सामना करना पड़ सकता है।

