महिंद्रा समूह की कंपनी महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी ने इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों के कारोबार में तेजी से विस्तार करते हुए करीब 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का मूल्यांकन हासिल कर लिया है।
इस तरह कंपनी एक अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य वाली यूनिकॉर्न बन गई है। कंपनी को 2027 की दूसरी छमाही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की तैयारी चल रही है। इस कारोबार को महिंद्रा एंड महिंद्रा के मुख्य कारोबार से अलग करके 2023 में स्थापित किया गया था।
महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी बनी एक अरब डॉलर की कंपनी
कंपनी को तेजी से आगे बढ़ाने में महिंद्रा एंड महिंद्रा और बाहरी निवेशकों की ओर से लगाए गए 2,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम की अहम भूमिका रही है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कंपनी में इक्विटी के जरिए करीब 900 करोड़ रुपये लगाए हैं। वहीं इंडिया-जापान फंड, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन और हाल में लाइटरॉक जैसे निवेशकों ने मिलकर करीब 1,322 करोड़ रुपये लगाए हैं।
30 जुलाई को कंपनी के लिए 322 करोड़ रुपये की नई निवेश राशि की घोषणा हुई थी। इस निवेश का नेतृत्व लाइटरॉक ने किया था और इसमें पहले से जुड़े इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन और इंडिया-जापान फंड ने भी हिस्सा लिया। इसी निवेश के बाद कंपनी का मूल्यांकन एक अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया।
🚗 महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी का निवेश
- मूल्यांकन: 10,000 करोड़ रुपये से अधिक
- कंपनी की स्थिति: एक अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य वाली यूनिकॉर्न
- कुल निवेश: 2,200 करोड़ रुपये से ज्यादा
- महिंद्रा एंड महिंद्रा: करीब 900 करोड़ रुपये
- नया निवेश: 322 करोड़ रुपये
- सूचीबद्धता की तैयारी: 2027 की दूसरी छमाही
कंपनी के कारोबार में पिछले दो वर्षों के दौरान बड़ी तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024 में महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी की आय 2,367 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 4,798 करोड़ रुपये हो गई। यानी दो साल में आय दोगुने से भी ज्यादा हो गई। कंपनी यात्री और माल ढुलाई के लिए इलेक्ट्रिक तीन पहिया और चार पहिया वाहन बेचती है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन भी इसके कारोबार का हिस्सा हैं।
कंपनी के मुनाफे में भी इस दौरान बड़ा सुधार हुआ। वित्त वर्ष 2024 में 26 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया गया था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 185 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में कुल 1,36,855 वाहन बेचे, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 26 प्रतिशत अधिक हैं। इनमें एक लाख से ज्यादा वाहन इलेक्ट्रिक थे।
नए उत्पादों से कारोबार बढ़ाने की तैयारी
हालांकि वित्त वर्ष 2026 में मुनाफे में पिछले साल की तुलना में कमी आई। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का मुनाफा 246 करोड़ रुपये था, जो अगले साल घटकर 185 करोड़ रुपये रह गया। इस दौरान कंपनी ने नए उत्पादों पर काफी ध्यान दिया। उसने यूडीओ नाम का नया इलेक्ट्रिक वाहन पेश किया और पहले से मौजूद कुछ वाहनों में भी बदलाव किए। कंपनी के अनुसार, इन नए उत्पादों का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर डिजाइन, ज्यादा दूरी और अच्छा प्रदर्शन देना था।
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने मई 2023 में इस कंपनी को इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों के बढ़ते बाजार को देखते हुए अलग कारोबार के रूप में तैयार किया था। भारत में इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। जून के अंत तक तीन पहिया वाहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 64 प्रतिशत बताई गई थी।
⚡ इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों की बढ़ती मांग
- इलेक्ट्रिक हिस्सेदारी: तीन पहिया वाहन क्षेत्र में करीब 64 प्रतिशत
- वित्त वर्ष 2026 की बिक्री: 1,36,855 वाहन
- इलेक्ट्रिक वाहन: एक लाख से ज्यादा
- आय: 2,367 करोड़ से बढ़कर 4,798 करोड़ रुपये
- शुद्ध मुनाफा: 26 करोड़ से बढ़कर 185 करोड़ रुपये
- मुख्य कारण: कम ईंधन खर्च और ज्यादा उपयोग
कंपनी को शुरुआती वर्षों में ही बाहरी निवेश मिला। 2023 में इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन ने 600 करोड़ रुपये और 2024 में इंडिया-जापान फंड ने 400 करोड़ रुपये का निवेश किया। दोनों निवेशकों ने बाद में अपने शेयरों को इक्विटी में बदल दिया। वित्त वर्ष 2026 के अंत तक दोनों के पास मिलाकर कंपनी की करीब 22 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। लाइटरॉक के नए निवेश के बाद बाहरी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत हो गई है।
इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों की बढ़ती मांग ने कंपनी के विकास को मजबूत आधार दिया है। भारत में व्यावसायिक तीन पहिया वाहनों में इलेक्ट्रिक बदलाव यात्री कारों की तुलना में तेजी से हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कम ईंधन खर्च और ज्यादा उपयोग के कारण व्यावसायिक इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों और ग्राहकों दोनों के लिए आकर्षक बन रहे हैं। महिंद्रा जैसे पुराने वाहन ब्रांड की बिक्री व्यवस्था, वित्त सुविधा और आपूर्ति नेटवर्क का लाभ मिलने से ऐसे नए कारोबार को तेजी से बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।