आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई नजदीक है। ऐसे में कई टैक्सपेयर्स समय सीमा बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार तय तारीख बढ़ने की संभावना काफी कम है।
आयकर रिटर्न (ITR) भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई नजदीक आने के साथ ही एक बार फिर कई टैक्सपेयर्स यह उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस बार भी समय सीमा बढ़ा सकती है। हालांकि पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड को देखने पर यह उम्मीद स्वाभाविक लगती है, लेकिन इस बार हालात पहले से अलग बताए जा रहे हैं। टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ITR Deadline बढ़ने की संभावना काफी कम है और सभी योग्य लोगों को तय समय के भीतर अपना रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए।
ITR Deadline बढ़ने की संभावना कितनी है
आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 जुलाई की अंतिम तारीख मुख्य रूप से ITR-1 और ITR-2 भरने वाले लोगों पर लागू होती है। इनमें नौकरीपेशा कर्मचारी, पेंशनभोगी, छात्र और ऐसे करदाता शामिल हैं जिनकी कुल आय ₹50 लाख तक है तथा जिनकी आय वेतन, दो मकानों, ब्याज, डिविडेंड, सीमित दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ और अन्य सामान्य स्रोतों से होती है। ऐसे करदाताओं के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना जरूरी माना जा रहा है।
📄 ITR Filing की मुख्य जानकारी
- अंतिम तारीख: 31 जुलाई
- लागू फॉर्म: ITR-1 और ITR-2
- मुख्य करदाता: नौकरीपेशा, पेंशनभोगी, छात्र
- आय सीमा: ₹50 लाख तक
- विशेषज्ञों की राय: समय सीमा बढ़ने की संभावना कम
- सलाह: समय पर रिटर्न दाखिल करें
पिछले पांच वर्षों में क्या हुआ
अगर पिछले पांच वर्षों पर नजर डालें तो आयकर विभाग ने चार बार अलग-अलग कारणों से रिटर्न दाखिल करने की तारीख बढ़ाई थी। आकलन वर्ष 2021-22 में कोरोना महामारी और ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ी दिक्कतों के कारण पहले 31 जुलाई से 30 सितंबर और बाद में 31 दिसंबर तक समय दिया गया था। ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की तारीख भी आगे बढ़ाई गई थी ताकि करदाताओं को राहत मिल सके।
आकलन वर्ष 2022-23 में ऑडिट वाले मामलों की समय सीमा बढ़ाई गई थी। उस समय कई करदाताओं ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं की शिकायत की थी, जिसके बाद सरकार ने अतिरिक्त समय देने का फैसला किया। वहीं आकलन वर्ष 2023-24 में किसी भी तरह का विस्तार नहीं दिया गया था और सभी को तय समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना पड़ा था।
लेट ITR भरने पर क्या होगा
आकलन वर्ष 2024-25 में ऑडिट रिपोर्ट और ऑडिट वाले करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख आगे बढ़ाई गई थी। इसके अलावा विलंबित रिटर्न भरने की समय सीमा भी बढ़ाई गई ताकि अधिक से अधिक लोग बिना अतिरिक्त परेशानी के अपना रिटर्न जमा कर सकें और जांच की संभावना कम हो।
पिछले आकलन वर्ष 2025-26 में भी सरकार ने पहले 31 जुलाई की समय सीमा बढ़ाकर 15 सितंबर की थी और बाद में तकनीकी दिक्कतों के कारण इसे एक दिन और बढ़ाकर 16 सितंबर कर दिया गया। उस समय नए ITR Form और रिपोर्टिंग नियम लागू किए गए थे, जिनके कारण ई-फाइलिंग प्रणाली को अपडेट करने में अतिरिक्त समय लगा था। कई लोगों को पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा था।
⏳ देरी से ITR भरने पर असर
- विलंबित रिटर्न: 31 दिसंबर तक
- लेट फीस: ₹5,000 तक
- ₹5 लाख तक आय: ₹1,000 लेट फीस
- ब्याज: 1% प्रति माह तक
- जोखिम: अतिरिक्त शुल्क और कानूनी परेशानी
- सलाह: अंतिम समय का इंतजार न करें
विशेषज्ञ समय पर रिटर्न भरने की सलाह क्यों दे रहे हैं
अगर कोई करदाता 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है तो उसके पास 31 दिसंबर तक विलंबित रिटर्न भरने का विकल्प रहेगा। हालांकि इसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। जिनकी कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, उन्हें ₹5,000 तक की लेट फीस देनी होगी, जबकि ₹5 लाख तक की आय वाले करदाताओं के लिए यह शुल्क ₹1,000 निर्धारित है। यदि किसी पर टैक्स बकाया है तो नियमानुसार उस पर हर महीने या महीने के हिस्से के लिए 1 प्रतिशत की दर से ब्याज भी लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार समय सीमा बढ़ने की संभावना इसलिए भी कम है क्योंकि आयकर विभाग ने पहले से ही रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया समय पर शुरू कर दी थी और आवश्यक फॉर्म भी पहले जारी कर दिए गए थे। इसके अलावा गैर-ऑडिट वाले व्यवसाय और पेशे से जुड़े कुछ करदाताओं को पहले ही 31 अगस्त तक का अतिरिक्त समय दिया जा चुका है। ऐसे में सामान्य श्रेणी के करदाताओं के लिए अलग से समय बढ़ाने की संभावना कम मानी जा रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 29 जुलाई तक 4.3 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए जा चुके हैं। इनमें से 4.1 करोड़ से ज्यादा रिटर्न सत्यापित भी हो चुके हैं, जबकि लगभग 2.4 करोड़ रिटर्न की प्रोसेसिंग पूरी की जा चुकी है। इससे साफ है कि बड़ी संख्या में लोग समय रहते अपना रिटर्न दाखिल कर रहे हैं और विभाग की प्रक्रिया भी सामान्य रूप से चल रही है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भी पहले बताया था कि सरकार ई-फाइलिंग पोर्टल की निगरानी लगातार कर रही है। इसके लिए अलग से डैशबोर्ड बनाया गया है, जहां किसी भी तकनीकी समस्या की पहचान कर उसे तय समय के भीतर ठीक किया जाता है। ऐसे में पोर्टल से जुड़ी बड़ी परेशानी की संभावना भी कम मानी जा रही है।
इन सभी कारणों को देखते हुए विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि करदाता आखिरी समय का इंतजार न करें और किसी संभावित विस्तार की उम्मीद में रिटर्न दाखिल करने में देरी न करें। समय पर Income Tax Return भरने से लेट फीस, ब्याज और अन्य कानूनी परेशानियों से आसानी से बचा जा सकता है।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य सूचना के लिए है। आयकर से जुड़े निर्णय लेने से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देश और विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
