झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे प्रतिबंधित माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेता मिसिर बेसरा को संयुक्त अभियान में गिरफ्तार कर लिया गया है।
झारखंड में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेता और कथित तौर पर देश के आखिरी Politburo सदस्य मिसिर बेसरा को धनबाद-गिरिडीह सीमा के मनियाडीह इलाके से गिरफ्तार किया गया है। उनके साथ दो सहयोगियों को भी हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मिसिर बेसरा पर कुल ₹2.20 करोड़ का Reward घोषित था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश कर रही थीं।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी कैसे हुई
जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाला है। इसके बाद झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों ने संयुक्त Operation चलाया। देर रात की गई कार्रवाई में उन्हें एक वाहन से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस दौरान दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
🚔 गिरफ्तारी की मुख्य बातें
- गिरफ्तार नेता: मिसिर बेसरा
- स्थान: मनियाडीह, धनबाद-गिरिडीह सीमा
- इनाम: ₹2.20 करोड़
- अभियान: झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त ऑपरेशन
- साथ में गिरफ्तार: दो सहयोगी
- स्थिति: पूछताछ जारी
सुरक्षा एजेंसियों ने कैसे बनाई रणनीति
बताया जाता है कि गिरिडीह जिले के पीरटांड क्षेत्र के रहने वाले मिसिर बेसरा करीब चार दशक पहले छात्र जीवन के दौरान माओवादी संगठन से जुड़े थे। इसके बाद उन्होंने संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई और समय के साथ शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद संगठन कमजोर होता गया और बेसरा को उसका प्रमुख सक्रिय नेता माना जा रहा था।
पिछले कुछ महीनों से सुरक्षा एजेंसियां उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थीं। खुफिया जानकारी के आधार पर कई बार उनकी तलाश की गई, लेकिन वह हर बार बच निकलने में सफल रहे। हाल में संगठन छोड़ने वाले कई पूर्व नक्सलियों से भी उनकी आवाजाही और ठिकानों से जुड़ी अहम जानकारी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने रणनीति बनाकर यह कार्रवाई की।
📋 मिसिर बेसरा से जुड़ी प्रमुख जानकारी
- मूल निवासी: पीरटांड, गिरिडीह
- संगठन से जुड़ाव: लगभग चार दशक
- 2007: खूंटी से गिरफ्तारी
- 2009: लखीसराय हमले में छुड़ाया गया
- मामले: 150 से अधिक
- जांच: NIA सहित कई एजेंसियां
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा
मिसिर बेसरा इससे पहले भी वर्ष 2007 में खूंटी से गिरफ्तार किए गए थे। हालांकि, वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय में अदालत परिसर पर हुए हमले के दौरान माओवादी उन्हें छुड़ाकर ले गए थे। इसके बाद वह कई वर्षों तक झारखंड के अलग-अलग जंगल क्षेत्रों में सक्रिय रहे और सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें कई गंभीर मामले शामिल बताए जाते हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी उन्हें कुछ मामलों में तलाश रही थी। झारखंड सरकार ने उन पर ₹1 करोड़ और ओडिशा सरकार ने ₹1.20 करोड़ का इनाम घोषित किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच रांची ले जाया गया, जहां उनसे आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
Disclaimer: यह जानकारी आधिकारिक एजेंसियों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। जांच आगे बढ़ने के साथ तथ्यों में बदलाव संभव है।