वित्त वर्ष 2026 में भारत में घर से बाहर खाने-पीने की चीजों की खपत में कमी दर्ज की गई है। वैश्विक बाजार शोध कंपनी Worldpanel by Numerator के अनुसार, मार्च 2026 तक के 12 महीनों में घर से बाहर खाने-पीने की चीजों की बिक्री की मात्रा 8.6 प्रतिशत घट गई। हालांकि इस दौरान लोगों का कुल खर्च थोड़ा बढ़ा है।
भारत में Out-of-Home खाने-पीने की खपत घटी
कंपनी के दक्षिण एशिया प्रमुख के. रामकृष्णन के अनुसार, जब लोगों पर खर्च का दबाव बढ़ता है तो घर के अंदर होने वाली खपत को कम करना आसान नहीं होता। ऐसे में लोग बाहर खाने या पीने के लिए जाने की संख्या कम कर सकते हैं। बाहर की खपत में कई चीजें अचानक और जरूरत से ज्यादा खरीदने से जुड़ी होती हैं, इसलिए लोग ऐसी खरीदारी में कटौती कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में घर से बाहर खाने-पीने पर खर्च की कुल रकम 0.5 प्रतिशत बढ़ी। इसका मतलब है कि लोग लगभग उतना ही पैसा खर्च कर रहे थे, लेकिन पहले की तुलना में कम सामान खरीद रहे थे। खरीदारी के लिए बाहर जाने की संख्या बढ़ने के बावजूद खरीदे गए पैकेटों की संख्या और उनका आकार कम हुआ।
यह आंकड़े Worldpanel के आउट-ऑफ-होम पैनल पर आधारित हैं। इस पैनल में 11,000 से अधिक परिवार हर महीने अपनी खपत से जुड़ी जानकारी देते हैं। रिपोर्ट में अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों के बीच भी खपत में गिरावट दर्ज की गई है।
🍽️ बाहर खाने-पीने की खपत में बदलाव
- बिक्री मात्रा: 8.6 प्रतिशत की गिरावट
- कुल खर्च: 0.5 प्रतिशत बढ़ा
- पैनल: 11,000 से अधिक परिवार
- असर: अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों में खपत घटी
- मुख्य कारण: बढ़ता खर्च और उपभोक्ताओं की सावधानी
मिनी-मेट्रो शहरों में सबसे ज्यादा असर
एक से चार लाख नहीं, बल्कि 10 लाख से 40 लाख की आबादी वाले छोटे बड़े शहरों की श्रेणी में आने वाले मिनी-मेट्रो शहरों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इन शहरों में बिक्री की मात्रा करीब 10 प्रतिशत कम हुई। इसके मुकाबले कुछ अन्य क्षेत्रों में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही।
के. रामकृष्णन ने इस गिरावट के पीछे फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद पैदा हुए एलपीजी संकट को भी एक वजह बताया। उनके अनुसार, बड़े महानगरों में घरों के स्तर पर एलपीजी की कमी का असर बहुत ज्यादा नहीं दिखा। हालांकि कुछ रेस्तरां प्रभावित हुए होंगे, लेकिन मिनी-मेट्रो शहरों में घरों तक भी एलपीजी की कमी का असर अधिक गंभीर रहा।
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसमें से लगभग 90 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। देश में 30 करोड़ से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ता होने के कारण आपूर्ति में परेशानी के समय घरेलू जरूरतों को रेस्तरां और व्यावसायिक रसोई की तुलना में प्राथमिकता दी गई।
महंगाई बढ़ने से Consumer Spending पर दबाव
एलपीजी की आपूर्ति में आई परेशानी ऐसे समय में सामने आई जब महंगाई का दबाव भी बढ़ रहा था। जुलाई में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, जबकि जून में यह 4.38 प्रतिशत थी। इस तरह महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के मध्य स्तर से ऊपर पहुंच गई।
खाद्य महंगाई में भी जुलाई में तेज बढ़ोतरी हुई और यह 5.52 प्रतिशत पर पहुंच गई। अक्टूबर 2025 में खाद्य महंगाई -5.02 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थी। इस बदलाव से पता चलता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव एक बार फिर बढ़ा है और इसका असर लोगों की खरीदारी की आदतों पर भी पड़ सकता है।
⚠️ LPG संकट और महंगाई का असर
- LPG आयात: भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत LPG आयात करता है
- आयात मार्ग: करीब 90 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है
- खुदरा महंगाई: जुलाई में 4.45 प्रतिशत
- खाद्य महंगाई: जुलाई में 5.52 प्रतिशत
- उपभोक्ता असर: बढ़ते खर्च के बीच खरीदारी में सावधानी
कम सामान खरीदकर बजट संभाल रहे उपभोक्ता
कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि लोगों ने बाहर खाने-पीने पर खर्च पूरी तरह बंद नहीं किया, लेकिन कम मात्रा में सामान खरीदना शुरू किया। बढ़ती कीमतों, एलपीजी की आपूर्ति से जुड़ी परेशानी और घरेलू खर्च के दबाव के कारण उपभोक्ता अपनी consumer spending को लेकर अधिक सावधानी बरतते दिखाई दिए।
Frequently asked questions
1. वित्त वर्ष 2026 में घर से बाहर खाने की खपत कितनी घटी?
वित्त वर्ष 2026 में भारत में घर से बाहर खाने-पीने की चीजों की बिक्री मात्रा 8.6 प्रतिशत कम हुई। हालांकि लोगों ने इस दौरान कुल खर्च में 0.5 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की।
2. मिनी-मेट्रो शहरों में F&B खपत पर कितना असर पड़ा?
मिनी-मेट्रो शहरों में घर से बाहर खाने-पीने की बिक्री मात्रा में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इन शहरों में एलपीजी की कमी का असर घरों और छोटे कारोबारों पर भी ज्यादा दिखाई दिया।
3. लोगों ने बाहर खाने पर कम खर्च किया या कम सामान खरीदा?
रिपोर्ट के मुताबिक लोगों का कुल खर्च 0.5 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन खरीदी गई चीजों की मात्रा कम हुई। इसका मतलब है कि महंगाई और बढ़ते खर्च के बीच उपभोक्ताओं ने लगभग उतने ही पैसे में कम सामान खरीदा।
4. LPG संकट का बाहर खाने के कारोबार पर क्या असर पड़ा?
एलपीजी की आपूर्ति में परेशानी ने खासकर छोटे शहरों और मिनी-मेट्रो क्षेत्रों को प्रभावित किया। घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता मिलने से रेस्तरां और व्यावसायिक रसोई के लिए गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा।
5. भारत में खाद्य महंगाई जुलाई 2026 में कितनी रही?
जुलाई 2026 में भारत की खाद्य महंगाई बढ़कर 5.52 प्रतिशत हो गई। यह अक्टूबर 2025 के -5.02 प्रतिशत के स्तर से काफी अधिक थी। बढ़ती खाद्य कीमतों का असर लोगों की खरीदारी और खर्च की आदतों पर पड़ा।
निष्कर्ष
भारत में बाहर खाने-पीने की मात्रा में गिरावट बताती है कि बढ़ती कीमतों और एलपीजी संकट के बीच लोग खरीदारी में सावधानी बरत रहे हैं। खर्च बहुत कम नहीं हुआ, लेकिन उपभोक्ताओं ने कम मात्रा में सामान खरीदकर बजट संभालने की कोशिश की।
Disclaimer: यह जानकारी समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश सलाह या वित्तीय निर्णय का आधार नहीं माना जाना चाहिए।