प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ धन शोधन के मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह शिकायत धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विशेष अदालत में दाखिल की गई है। एजेंसी ने कंपनी के साथ सतीश सेठ और कुछ अन्य लोगों को भी मामले में आरोपी बनाया है। ED के अनुसार, इस मामले में सरकारी धन को दूसरी जगह भेजने से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है।
ED ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ शिकायत दाखिल की
जांच एजेंसी ने बताया कि चार NHAI टोल रोड परियोजनाओं से जुड़े धन को कथित तौर पर दूसरी जगह भेजने की एक संगठित योजना सामने आई है। इन परियोजनाओं में त्रिची-करूर, त्रिची-दिंडीगुल, सलेम-उलुंदुरपेट और जयपुर-रींगस मार्ग शामिल हैं। इन सड़क परियोजनाओं के लिए NHAI से अनुदान और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से कर्ज लिया गया था।
ED का आरोप है कि सितंबर और अक्टूबर 2010 के दौरान करीब 187 करोड़ रुपये को फर्जी ठेकों और बाद में तैयार किए गए या पिछली तारीख के दस्तावेजों के माध्यम से दूसरी जगह भेजा गया। एजेंसी के मुताबिक, यह रकम ऐसे उप-ठेकों के नाम पर दिखाई गई, जिनका वास्तविक काम से संबंध नहीं था। जांच में सामने आए लेनदेन के आधार पर एजेंसी ने इसे सरकारी और वित्तीय संस्थानों से मिले धन के कथित गलत इस्तेमाल का मामला बताया है।
जांच के अनुसार, रकम का रास्ता रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, उससे जुड़ी परियोजना आधारित विशेष कंपनियों और EPC ठेकेदारों से होते हुए निर्माण ठेकेदारों तक पहुंचा। इसके बाद कथित तौर पर यह पैसा ऐसी कंपनियों को भेजा गया, जिनका सड़क निर्माण से कोई सीधा संबंध नहीं था। ED का कहना है कि बाद में इन पैसों के लेनदेन को वास्तविक परियोजना खर्च दिखाने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए।
ED जांच में सामने आए मुख्य आरोप
- कथित रकम: करीब 187 करोड़ रुपये
- परियोजनाएं: चार NHAI टोल रोड परियोजनाएं
- आरोप: फर्जी ठेकों के जरिए धन दूसरी जगह भेजना
- दस्तावेज: कथित तौर पर बाद में तैयार और पिछली तारीख के दस्तावेज
- कानून: धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA)
कई कंपनियों के जरिए रकम भेजने का आरोप
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि रकम को कई कंपनियों और हीरा कारोबार से जुड़े लोगों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर भेजा गया। इस प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर धन के वास्तविक स्रोत और इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश की गई। मामले की जांच में फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है।
ED ने इस मामले में 3 अगस्त को करीब 187 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पास मौजूद रिलायंस पावर के शेयर और कुछ अचल संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, क्षीराब्द कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर मौजूद जमीन को भी कुर्की की कार्रवाई में शामिल किया गया है।
इस मामले में सतीश सेठ को 12 जून को गिरफ्तार किया गया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ED के अनुसार, मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी ने कहा है कि जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मुंबई पुलिस की FIR से शुरू हुई जांच
इस जांच की शुरुआत मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की 11 फरवरी 2026 को दर्ज FIR के आधार पर हुई थी। इस FIR में आरोप लगाया गया था कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के जरिए कुछ कंपनियां बनाई और चलाई गईं। इन कंपनियों का कथित तौर पर इस्तेमाल फर्जी बिलों के आधार पर रकम भेजने और विदेश में धन भेजने के लिए किया गया।
मामले में अब तक की कार्रवाई
- FIR: 11 फरवरी 2026 को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने दर्ज की
- गिरफ्तारी: सतीश सेठ को 12 जून को गिरफ्तार किया गया
- कुर्की: 3 अगस्त को करीब 187 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क
- अदालत: PMLA के तहत विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत
- जांच: अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी
ED के मुताबिक, इन लेनदेन में अधिक कीमत दिखाकर किए गए हीरा आयात से जुड़े दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से भेजी गई रकम में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी और धन का अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ। मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
अस्वीकरण: मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।
