प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों और उनके पूर्व अधिकारियों के खिलाफ धन शोधन के दो अलग-अलग मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए हैं।
एजेंसी ने रविवार को बताया कि एक मामला रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़ा है, जबकि दूसरा RCOM यानी रिलायंस कम्युनिकेशंस से संबंधित है। दोनों मामलों में हजारों करोड़ रुपये की रकम को कथित तौर पर दूसरी जगह भेजने और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की जांच की जा रही है।
अनिल अंबानी समूह से जुड़े दो मामलों में आरोप पत्र
पहले मामले में ED ने शनिवार को द्वारका स्थित धन शोधन निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, पूर्व रिलायंस समूह अधिकारी सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। सेठ को जून में गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने 2025 में रिलायंस समूह छोड़ दिया था।
दूसरा मामला RCOM से जुड़ा है, जिसमें एजेंसी ने शनिवार को राउज एवेन्यू की विशेष अदालत में अतिरिक्त आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में मुख्य आरोप पत्र मार्च में दाखिल किया गया था। ED के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, सतीश सेठ, गौतम दोषी, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। दोषी को जून में और सेठ को जुलाई में गिरफ्तार किया गया था। दोनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
ED की जांच में सामने आए दो मामले
- पहला मामला: रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़ा
- दूसरा मामला: RCOM यानी रिलायंस कम्युनिकेशंस से संबंधित
- पहले मामले में: करीब 187 करोड़ रुपये की कथित रकम दूसरी जगह भेजने का आरोप
- दूसरे मामले में: करीब 40,185 करोड़ रुपये की कथित अपराध से हुई आय
- जांच: दोनों मामलों में जांच अभी जारी है
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर मामले की जांच
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मामले की शुरुआत मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की फरवरी में दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के जरिए कुछ कंपनियां बनाई और चलाई गईं। इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी बिलों के आधार पर रकम इधर-उधर भेजने और विदेश में धन भेजने के लिए किया गया। जांच में अधिक कीमत दिखाकर किए गए हीरा निर्यात से जुड़े लेनदेन की भी बात सामने आई।
ED के अनुसार, जांच में चार NHAI से जुड़े टोल रोड परियोजनाओं में सरकारी धन को दूसरी जगह भेजने की एक संगठित योजना का पता चला। इनमें त्रिची-करूर, त्रिची-दिंडीगुल, सलेम-उलुंदुरपेट और जयपुर-रींगस सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के लिए NHAI की ओर से अनुदान और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से कर्ज दिया गया था।
एजेंसी का आरोप है कि सितंबर और अक्टूबर 2010 के दौरान करीब 187 करोड़ रुपये को फर्जी या बाद में तैयार किए गए ठेकों के जरिए दूसरी जगह भेजा गया। रकम पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर या उससे जुड़ी विशेष कंपनियों और निर्माण ठेकेदारों तक पहुंची और इसके बाद ऐसी कंपनियों को भेजी गई, जिनका सड़क निर्माण से कोई सीधा संबंध नहीं था।
187 करोड़ रुपये की कथित रकम का मामला
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन लेनदेन को वास्तविक परियोजना खर्च दिखाने के लिए बाद में दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद रकम को कई कंपनियों और हीरा कारोबार से जुड़े लोगों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया। ED ने इस मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पास मौजूद रिलायंस पावर के शेयरों और कुछ अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 187 करोड़ रुपये बताई गई है।
RCOM मामले में ED के आरोप
- कथित अपराध से हुई आय: करीब 40,185 करोड़ रुपये
- कुर्क संपत्तियां: करीब 8,078 करोड़ रुपये
- आरोप: कर्ज से मिली रकम का कथित गलत इस्तेमाल
- रकम का इस्तेमाल: पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाने का आरोप
- जांच: अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी
RCOM मामले में कर्ज की रकम के इस्तेमाल की जांच
RCOM से जुड़े दूसरे मामले की जांच कई CBI एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। इसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस टेलीकॉम और रिलायंस इंफ्राटेल पर कर्ज से जुड़ी सुविधाओं का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल और रकम को दूसरी जगह भेजने के आरोप हैं। ED के अनुसार, नई कर्ज सुविधाओं से मिली रकम का इस्तेमाल उनके तय उद्देश्य के बजाय पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाने, रकम को घुमाने और पुरानी देनदारियों को बनाए रखने में किया गया।
एजेंसी का आरोप है कि रकम को समूह की कंपनियों, विशेष रूप से बनाई गई संस्थाओं, अलग-अलग बैंक खातों और तरल म्यूचुअल फंड के जरिए कई स्तरों पर भेजा गया। इस पैसे का इस्तेमाल पुराने विदेशी कर्ज और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड की देनदारी चुकाने में किया गया और बाद में इसे वैध कारोबारी खर्च या आय के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।
ED ने आरोप लगाया है कि कर्ज से मिली रकम को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस कैपिटल जैसी समूह कंपनियों की ओर भेजा गया। एजेंसी के अनुसार, कुछ रकम का इस्तेमाल प्रमोटरों की भारत के बाहर निजी संपत्तियां खरीदने में भी किया गया। साथ ही, रकम के एक हिस्से का इस्तेमाल RCOM के मुनाफे को कृत्रिम तरीके से बढ़ाकर दिखाने के लिए किए जाने का आरोप है।
40,185 करोड़ रुपये की कथित अपराध से हुई आय
RCOM से जुड़े मामले में कथित अपराध से हुई आय करीब 40,185 करोड़ रुपये बताई गई है। ED ने करीब 8,078 करोड़ रुपये की संपत्तियां पहले ही कुर्क कर रखी हैं और अदालत से इन संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। एजेंसी ने कहा है कि दोनों मामलों में जांच अभी जारी है और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध आरोपों पर आधारित है और अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
