प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) से जुड़े 40,185.55 करोड़ रुपये के कथित धन शोधन मामले में एक और आरोप पत्र दाखिल किया है।
यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की गई है। एजेंसी ने शनिवार को नई दिल्ली की PMLA मामलों की विशेष अदालत में यह अतिरिक्त शिकायत दाखिल की। इससे पहले 27 मार्च को मामले में मुख्य आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
ED ने RCOM मामले में दाखिल किया अतिरिक्त आरोप पत्र
ED के अनुसार, RCOM, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL), गौतम भैलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य लोगों को मामले में आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने कथित अपराध से हुई आय की राशि 40,185.55 करोड़ रुपये बताई है। यह रकम उन बकाया राशि से जुड़ी है, जिसे कर्ज लेने वाली कंपनियों ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डधारकों के समूह को कथित तौर पर नहीं चुकाया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने धन जुटाने, उसके इस्तेमाल, छिपाने और उसे वैध रूप में दिखाने में अलग-अलग भूमिका निभाई। जांच में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड यानी FCCB के जरिए जुटाए गए 1 अरब डॉलर के इस्तेमाल को लेकर कथित गलत प्रमाण पत्र देने की बात भी सामने आई है। ED का कहना है कि इन पैसों के वास्तविक इस्तेमाल के बारे में गलत जानकारी दी गई।
RCOM मामले में ED की बड़ी कार्रवाई
- कथित धन शोधन राशि: 40,185.55 करोड़ रुपये
- कानून: Prevention of Money Laundering Act
- मुख्य आरोप पत्र: 27 मार्च को दाखिल
- अतिरिक्त शिकायत: PMLA मामलों की विशेष अदालत में दाखिल
- FCCB से जुटाई रकम: 1 अरब डॉलर
8,078 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई
ED ने करीब 8,078.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। ये संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं और संबंधित प्राधिकरण ने उनकी कुर्की की पुष्टि भी कर दी है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में मौजूद पट्टे वाली जमीन और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, गौतम दोषी को 12 जून को गिरफ्तार किया गया था, जबकि सतीश सेठ को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में मुख्य आरोप पत्र का संज्ञान विशेष अदालत ने 15 जून को लिया था।
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज की गई कई FIR के बाद शुरू हुई। ये मामले नई दिल्ली स्थित CBI की बैंकिंग, प्रतिभूति और धोखाधड़ी शाखा में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए थे। आरोपों में RCOM, RTL और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड पर कथित तौर पर कर्ज सुविधाओं का गलत तरीके से इस्तेमाल और धन को दूसरी जगह भेजने की बात शामिल है।
कर्ज की रकम के कथित इस्तेमाल की जांच
ED के अनुसार, जांच में ऐसे कई आपस में जुड़े लेनदेन सामने आए, जिनमें नई कर्ज सुविधाओं से मिले पैसों का इस्तेमाल उनके तय उद्देश्य के बजाय पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाने या उन्हें घुमाने में कथित तौर पर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि रकम को कई समूह कंपनियों, विशेष रूप से बनाई गई कंपनियों, अलग-अलग बैंक खातों और म्यूचुअल फंड के जरिए अलग-अलग स्तरों पर भेजा गया।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि इन पैसों का इस्तेमाल पुराने विदेशी कर्ज और FCCB की देनदारी चुकाने में किया गया। बाद में इन लेनदेन को सामान्य कारोबारी खर्च या आय के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। ED के मुताबिक, कथित गतिविधियों का सिलसिला कम से कम 2007 से शुरू हुआ और लंबे समय तक आपस में जुड़े लेनदेन के रूप में चलता रहा।
जांच में सामने आए कथित लेनदेन
- कर्ज की रकम: पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज से जुड़े इस्तेमाल का आरोप
- समूह कंपनियां: रकम भेजने में इस्तेमाल किए जाने का आरोप
- बैंक खाते: अलग-अलग स्तरों पर लेनदेन का आरोप
- म्यूचुअल फंड: रकम के कथित हस्तांतरण में इस्तेमाल
- जांच अवधि: कथित गतिविधियां कम से कम 2007 से
प्रमोटरों की संपत्तियों और अन्य लेनदेन की जांच
एजेंसी का आरोप है कि कर्ज से मिले पैसों को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी समूह कंपनियों की ओर भेजा गया। इसके अलावा, प्रमोटरों के भारत से बाहर निजी संपत्तियां खरीदने में भी रकम के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। ED ने यह भी कहा है कि कुछ पैसों का इस्तेमाल RCOM के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर दिखाने के लिए किया गया।
मामले में ED की जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ धन के कथित इस्तेमाल, अलग-अलग लेनदेन और इसमें शामिल लोगों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध आरोपों पर आधारित है और मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
