सोने की कीमतों में तेजी के बीच अब चांदी के गहनों की मांग भी बढ़ रही है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) देशभर में चांदी के गहनों की जांच की सुविधा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। BIS के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आने वाले दो वर्षों में चांदी की जांच के लिए रेफरल और जांच प्रयोगशालाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि बढ़ती जरूरत को पूरा किया जा सके।
चांदी के गहनों की जांच सुविधा बढ़ाएगा BIS
चांदी के गहनों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था साल 2005 से स्वैच्छिक है। सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाले चांदी के सामान पर HUID नंबर भी दिया जा रहा है। इस नंबर की मदद से ग्राहक गहने की शुद्धता से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकते हैं। BIS के अनुसार, HUID की शुरुआत के बाद चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में हॉलमार्क किए गए चांदी के गहनों की संख्या बढ़कर 59 लाख हो गई। इससे एक साल पहले वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या करीब 32 लाख थी। फिलहाल देशभर में लगभग 230 ऐसे जांच और हॉलमार्क केंद्र हैं, जिन्हें BIS ने चांदी के गहनों की जांच के लिए मान्यता दी हुई है।
BIS के उप महानिदेशक निशात एस हक के अनुसार, फिलहाल अगले करीब दो वर्षों तक चांदी के गहनों की जांच की बढ़ती जरूरत को BIS की अपनी प्रयोगशालाओं के जरिए पूरा किया जा सकता है। इस अवधि के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में रेफरल और जांच प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने पर काम किया जाएगा।
चांदी की हॉलमार्किंग की अहम जानकारी
- हॉलमार्किंग व्यवस्था: साल 2005 से स्वैच्छिक
- HUID नंबर: सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाले चांदी के सामान पर
- 2025-26 में हॉलमार्क किए गहने: 59 लाख
- 2024-25 में हॉलमार्क किए गहने: करीब 32 लाख
- चांदी जांच और हॉलमार्क केंद्र: लगभग 230
BIS की प्रयोगशालाओं में होगी जांच
BIS हॉलमार्क वाले सोने के गहनों की बाजार निगरानी के लिए अपनी प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल करता है। इसके लिए जांच का काम बाहरी प्रयोगशालाओं को नहीं दिया जाता। अधिकारी के अनुसार, यह व्यवस्था ग्राहकों के भरोसे को बढ़ाने में काफी महत्वपूर्ण रही है। पिछले एक साल में BIS की प्रयोगशालाओं में करीब 2.7 लाख उत्पाद नमूनों की जांच की गई।
फिलहाल BIS देशभर में अपनी 10 प्रयोगशालाएं संचालित करता है। इसके अलावा निजी और सरकारी क्षेत्र की कई मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं भी उसकी जांच व्यवस्था से जुड़ी हैं। साल 2014 में BIS से करीब 147 प्रयोगशालाएं मान्यता प्राप्त थीं और 24 सरकारी प्रयोगशालाएं उसके साथ जुड़ी थीं। अब मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़कर करीब 440 और संबंधित सरकारी प्रयोगशालाओं की संख्या 350 हो गई है।
BIS ने अलग-अलग उत्पादों के लिए करीब 23 हजार मानक तय किए हैं। इनमें लगभग 700 मानक अनिवार्य हैं। बढ़ते जांच कार्य को देखते हुए प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को आगे भी बढ़ाने की योजना है। संस्था का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और रोबोट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल जांच की गति बढ़ाने, पारदर्शिता सुधारने और मानवीय गलतियों को कम करने के लिए किया जा सकता है।
जांच में AI और रोबोट जैसी तकनीक का इस्तेमाल
BIS इस साल सीमेंट की जांच के लिए एक रोबोटिक प्रणाली का परीक्षण भी कर रहा है। इसके परिणाम के आधार पर दूसरी प्रयोगशालाओं में भी ऐसी तकनीक का विस्तार किया जा सकता है। जांच उपकरणों को प्रयोगशाला के सूचना प्रबंधन सिस्टम से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है, जिससे जांच के आंकड़े अपने आप दर्ज और गणना किए जा सकें। प्रयोगशालाओं के कुछ हिस्सों में निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए गए हैं।
BIS के काम में मोबाइल फोन से जुड़े मानक भी शामिल हैं। साल 2016 के एक भारतीय मानक के अनुसार भारत में बिकने वाले मोबाइल फोन में अंग्रेजी, हिंदी और एक क्षेत्रीय भाषा में संदेश भेजने की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही सभी 22 आधिकारिक भाषाओं को प्रदर्शित करने की क्षमता का प्रावधान किया गया था। इसका एक उद्देश्य यह भी था कि आपातकालीन सूचनाएं ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकें।
BIS की जांच व्यवस्था और ग्राहक सुविधा
- BIS की अपनी प्रयोगशालाएं: 10
- मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं: करीब 440
- संबंधित सरकारी प्रयोगशालाएं: 350
- तय किए गए उत्पाद मानक: करीब 23 हजार
- पिछले एक साल में जांच: करीब 2.7 लाख उत्पाद नमूने
BIS Care ऐप से दर्ज कर सकते हैं शिकायत
BIS की साहिबाबाद स्थित केंद्रीय प्रयोगशाला को भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से नोट छांटने वाली मशीनों की जांच की जिम्मेदारी भी दी गई है। इन मशीनों की नकली नोट पहचानने की क्षमता की जांच सरकारी प्रयोगशाला में की जाती है। इसके अलावा BIS बाजार में ISI चिह्न वाले हेलमेट और घरेलू उपकरणों जैसे उत्पादों की नियमित जांच भी करता है।
ग्राहक BIS से प्रमाणित किसी उत्पाद को लेकर शिकायत होने पर BIS Care ऐप के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद BIS अपनी ओर से उत्पाद की जांच करा सकता है। संस्था ने ग्राहकों से प्रमाणित उत्पाद खरीदने और गुणवत्ता चिह्न देखकर सामान लेने की अपील की है। चांदी के गहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले समय में जांच केंद्रों का विस्तार ग्राहकों को शुद्धता को लेकर ज्यादा भरोसा देने में मदद कर सकता है।
