जुलाई में छोटी SUV की बिक्री बढ़ी, पंच बनी नंबर-1

भारत में छोटी एसयूवी गाड़ियों की बिक्री ने जुलाई 2026 में शानदार प्रदर्शन किया। चार मीटर से छोटी एसयूवी श्रेणी की 14 गाड़ियों की कुल बिक्री 1,16,552 इकाई रही। पिछले साल जुलाई में इन गाड़ियों की 86,544 इकाई बिकी थीं। इस तरह एक साल में बिक्री में 34.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि भारतीय ग्राहकों के बीच छोटी एसयूवी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

जुलाई में टाटा पंच बनी सबसे ज्यादा बिकने वाली छोटी एसयूवी

जुलाई में टाटा पंच इस श्रेणी की सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ी रही। इसकी 21,313 इकाइयां बिकीं, जबकि पिछले साल जुलाई में यह आंकड़ा 10,785 था। यानी पंच की बिक्री में 97.6 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी हुई। इस गाड़ी ने कुल श्रेणी में 18.3 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की।

दूसरे स्थान पर मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स रही। जुलाई में इसकी 19,473 इकाइयां बिकीं, जबकि एक साल पहले 12,872 इकाइयों की बिक्री हुई थी। इसकी बिक्री में 51.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। फ्रॉन्क्स की श्रेणी में 16.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रही और यह पंच से करीब 1,840 इकाई पीछे रही।

🚙 जुलाई में छोटी एसयूवी की बिक्री

  • कुल बिक्री: 1,16,552 इकाई
  • पिछले साल: 86,544 इकाई
  • सालाना बढ़ोतरी: 34.7 प्रतिशत
  • सबसे ज्यादा बिक्री: टाटा पंच
  • पंच की बिक्री: 21,313 इकाइयां

टाटा नेक्सॉन 17,471 इकाइयों की बिक्री के साथ तीसरे स्थान पर रही। पिछले साल जुलाई में इसकी 12,825 इकाइयां बिकी थीं। इस तरह नेक्सॉन की बिक्री 36.2 प्रतिशत बढ़ी। श्रेणी में इसकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत रही। पंच और नेक्सॉन को मिलाकर 38,784 इकाइयों की बिक्री हुई, यानी इस श्रेणी की करीब एक-तिहाई बिक्री इन दोनों गाड़ियों से हुई।

ब्रेजा की बिक्री घटी, वेन्यू और एक्सटर की मांग बढ़ी

मारुति सुजुकी ब्रेजा 12,055 इकाइयों की बिक्री के साथ चौथे स्थान पर रही। पिछले साल जुलाई में इसकी 14,065 इकाइयां बिकी थीं। इस तरह ब्रेजा की बिक्री में 14.3 प्रतिशत की गिरावट आई। जुलाई में यह एकमात्र ऐसी गाड़ी रही जिसकी बिक्री पिछले साल के मुकाबले कम हुई।

हुंडई वेन्यू 11,095 इकाइयों की बिक्री के साथ पांचवें स्थान पर रही। पिछले साल इसकी 8,054 इकाइयां बिकी थीं। इस बार बिक्री में 37.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और इसकी श्रेणी में 9.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। हुंडई की दूसरी गाड़ी एक्सटर ने 6,810 इकाइयों की बिक्री दर्ज की। इसकी बिक्री पिछले साल की 5,075 इकाइयों से 34.2 प्रतिशत बढ़ी।

महिंद्रा एक्सयूवी 3XO की 9,429 इकाइयां बिकीं। पिछले साल जुलाई में इसकी 7,238 इकाइयां बिकी थीं। इस तरह बिक्री में 30.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और श्रेणी में इसकी हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत रही। किआ सोनेट की 8,913 इकाइयां बिकीं, जो पिछले साल की 7,627 इकाइयों से 16.9 प्रतिशत अधिक है।

📊 प्रमुख गाड़ियों की बिक्री

  • टाटा पंच: 21,313 इकाइयां
  • मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स: 19,473 इकाइयां
  • टाटा नेक्सॉन: 17,471 इकाइयां
  • मारुति सुजुकी ब्रेजा: 12,055 इकाइयां
  • हुंडई वेन्यू: 11,095 इकाइयां
  • महिंद्रा एक्सयूवी 3XO: 9,429 इकाइयां

स्कोडा काइलैक की 3,727 इकाइयां बिकीं, जो पिछले साल की 3,377 इकाइयों से 10.4 प्रतिशत अधिक है। टोयोटा टैसर की 2,470 इकाइयां बिकीं और इसकी बिक्री में 46.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। निसान मैग्नाइट की 1,462 इकाइयां बिकीं, जिसमें सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई।

किआ साइरोस की बिक्री 1,303 इकाई रही। पिछले साल इसकी 834 इकाइयां बिकी थीं, यानी बिक्री में 56.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मारुति सुजुकी जिम्नी की 528 इकाइयां बिकीं और इसकी बिक्री 45.9 प्रतिशत बढ़ी। वहीं रेनो काइगर 503 इकाइयों की बिक्री के साथ सूची में सबसे नीचे रही, लेकिन इसकी बिक्री भी पिछले साल की तुलना में 55.7 प्रतिशत बढ़ी।

पंच, फ्रॉन्क्स और नेक्सॉन की बिक्री का बड़ा हिस्सा

जुलाई के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि बाजार की बिक्री कुछ प्रमुख गाड़ियों पर काफी ज्यादा केंद्रित रही। टाटा पंच, मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स और टाटा नेक्सॉन ने मिलकर 58,257 इकाइयां बेचीं। इन तीनों गाड़ियों की कुल श्रेणी में हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत रही। अगर ब्रेजा और वेन्यू को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो पांच प्रमुख गाड़ियों ने जुलाई की कुल बिक्री का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया।

कुल मिलाकर इस श्रेणी की 14 में से 13 गाड़ियों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले बढ़ी। केवल ब्रेजा की बिक्री में गिरावट आई। Tata Punch की लगभग दोगुनी बिक्री, फ्रॉन्क्स, नेक्सॉन, वेन्यू और एक्सयूवी 3XO की मजबूत मांग ने पूरी श्रेणी की वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाई।

जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कार बाजार में छोटी एसयूवी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। कम आकार, उपयोगिता और एसयूवी जैसी डिजाइन के कारण ग्राहक इन गाड़ियों को पसंद कर रहे हैं। एक ही महीने में 1.16 लाख से ज्यादा गाड़ियों की बिक्री और करीब 35 प्रतिशत की सालाना वृद्धि इस श्रेणी की मजबूत मांग को दिखाती है।

अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध बिक्री आंकड़ों पर आधारित है और इसे खरीदारी की सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

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