AI बदल सकता है प्रतिभा चुनने का तरीका, कम हो सकता है Gatekeeping

आज की दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं जहां हजारों लोग किसी प्रतियोगिता, नौकरी, शोध या रचनात्मक काम के लिए अपना योगदान देते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के काम को इंसानों द्वारा पूरी निष्पक्षता से जांचना आसान नहीं है। हर व्यक्ति के पास सीमित समय होता है और किसी काम को अच्छा या खराब बताने में उसकी अपनी पसंद और सोच भी शामिल हो जाती है। ऐसे में artificial intelligence यानी AI भविष्य में यह तय करने का एक नया तरीका दे सकता है कि कौन-सा काम वास्तव में बेहतर है।

AI कैसे निष्पक्ष चयन का नया तरीका बन सकता है

बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रमुख अक्सर अपने बनाए AI सिस्टम को लेकर चिंता भी जाहिर करते हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक बहुत शक्तिशाली है और अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि कंपनियां अपनी तकनीक की क्षमता दिखाना चाहती हैं। साथ ही वे यह संदेश भी देना चाहती हैं कि वे इसके खतरों को समझती हैं और जिम्मेदारी से काम कर रही हैं।

AI से जुड़े कई बड़े नाम अब इस तकनीक के लिए नए नियमों और स्वतंत्र जांच व्यवस्था की बात कर रहे हैं। उनका मानना है कि शक्तिशाली AI मॉडल को आम लोगों के लिए उपलब्ध कराने से पहले उनकी जांच होनी चाहिए। हालांकि केवल कंपनियों द्वारा खुद के लिए बनाए गए नियम सरकारों और आम लोगों की चिंता को पूरी तरह दूर कर पाएंगे, यह निश्चित नहीं है।

इस पूरी चर्चा में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या AI उन लोगों के लिए रास्ता खोल सकता है जिन्हें आज की व्यवस्था में पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। दुनिया के कई क्षेत्रों में कुछ चुनिंदा लोग यह तय करते हैं कि किसे सम्मान मिलेगा, कौन-सा शोध महत्वपूर्ण है, कौन-सी किताब अच्छी है और कौन-सी कला लोगों तक पहुंचेगी। इसे gatekeeping कहा जा सकता है। इसमें कुछ लोगों की राय पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण बन जाती है।

प्रतिष्ठा और पहचान का प्रभाव

इंटरनेट ने कुछ क्षेत्रों में इस व्यवस्था को कमजोर जरूर किया है, लेकिन प्रतिष्ठा और पहचान का प्रभाव अभी भी काफी मजबूत है। विज्ञान में भी ऐसा हो सकता है कि किसी नए व्यक्ति का विचार केवल इसलिए नजरअंदाज कर दिया जाए क्योंकि उसके पास बड़ी संस्था या प्रसिद्ध नाम का समर्थन नहीं है। अगर अल्बर्ट आइंस्टीन के शुरुआती विचार आज के समय में किसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में भेजे जाते, तो संभव है कि उनकी पहचान देखकर ही उन्हें गंभीरता से लिया जाता।

आज वैज्ञानिक पत्रिकाओं में इतनी बड़ी संख्या में शोध भेजे जाते हैं कि इंसानों के लिए हर विचार को पूरी तरह पढ़ना संभव नहीं है। ऐसे में कई अच्छे विचार भी नजरअंदाज हो सकते हैं। AI ऐसी व्यवस्था बना सकता है जो अलग-अलग भाषाओं में लिखे गए वैज्ञानिक शोधों को पढ़कर उनकी गुणवत्ता और महत्व का आकलन करे। इससे किसी शोध को केवल उसके लेखक की प्रसिद्धि के आधार पर नहीं, बल्कि उसके विचार और उपयोगिता के आधार पर देखा जा सकता है।

ऐसी व्यवस्था शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव ला सकती है। बड़ी यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए हजारों आवेदन आते हैं और उन्हें कुछ लोगों द्वारा जांचना पड़ता है। इंसानों से पूरी तरह निष्पक्ष फैसला लेने की उम्मीद करना मुश्किल है, क्योंकि उनकी सोच और पसंद का असर चयन पर पड़ सकता है। AI बड़ी संख्या में आवेदनों को एक समान तरीके से देखकर शुरुआती चयन में मदद कर सकता है।

कला और साहित्य में AI की भूमिका

कला और साहित्य में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। दुनिया में हर साल बहुत बड़ी संख्या में कहानियां, किताबें और पटकथाएं लिखी जाती हैं। प्रसिद्ध लेखकों को पढ़ने के लिए लोगों के पास समय होता है, लेकिन नए और अनजान लेखकों की रचनाएं अक्सर शुरुआती स्तर पर ही नजरअंदाज हो जाती हैं। AI लाखों रचनाओं को पढ़कर उनकी तुलना कर सकता है और यह पहचानने की कोशिश कर सकता है कि कौन-सी रचना लोगों को पसंद आ सकती है या भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।

पुरस्कारों की व्यवस्था में भी इसी तरह की समस्या दिखाई देती है। जब कुछ लोग सैकड़ों किताबों में से कुछ को चुनते हैं, तो उनके पास हर किताब को पूरी तरह पढ़ने का समय नहीं होता। इसके अलावा किसी निर्णायक की व्यक्तिगत पसंद भी परिणाम को प्रभावित कर सकती है। अगर AI को वास्तविक पाठकों की पसंद और अनुभवों से प्रशिक्षित किया जाए, तो वह यह समझने में मदद कर सकता है कि अलग-अलग लोग किसी किताब, फिल्म या नाटक को क्यों पसंद करते हैं।

AI आधारित चयन में संभावित खतरे

हालांकि AI को इस तरह की जिम्मेदारी देने में खतरे भी हैं। अगर AI किसी अच्छी रचना को गलत तरीके से खारिज कर दे तो उसका नुकसान हो सकता है। आज किसी लेखक को अगर कुछ लोग अस्वीकार करते हैं, तो वह इसे मानवीय पसंद या पक्षपात मान सकता है। लेकिन अगर वही फैसला एक AI व्यवस्था करे, तो उसे यह स्वीकार करना कठिन लग सकता है कि शायद पूरी व्यवस्था ने उसके काम को पसंद नहीं किया।

फिर भी, ऐसी व्यवस्था मौजूदा व्यवस्था से बेहतर हो सकती है, जहां कुछ चुनिंदा लोग बाकी लोगों के लिए यह तय करते हैं कि क्या अच्छा है और क्या लोगों के सामने लाया जाना चाहिए। AI का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि वह बड़े स्तर पर कामों की जांच कर सके और उन प्रतिभाओं को सामने लाने में मदद करे जिन्हें आज प्रतिष्ठा, पहचान या सीमित अवसरों के कारण पर्याप्त जगह नहीं मिलती।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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