डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच देश में 5.85 लाख से ज्यादा डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के मामले सामने आए। इन मामलों में कुल 3,590.70 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।
डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में डिजिटल धोखाधड़ी के 65,890 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 252.07 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। इसके बाद 2022-23 में मामले बढ़कर 75,770 हो गए और इसमें शामिल राशि 420.14 करोड़ रुपये रही।
वर्ष 2023-24 में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली। इस दौरान 2,93,239 मामले सामने आए, जिनमें 2,060.75 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल थी। हालांकि इसके बाद मामलों में गिरावट दर्ज की गई। 2024-25 में 1,44,855 मामले सामने आए और इनमें 821.88 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।
🔐 डिजिटल फ्रॉड के आंकड़े
- अवधि: 2021-22 से 2025-26
- कुल मामले: 5.85 लाख से ज्यादा
- कुल राशि: 3,590.70 करोड़ रुपये
- सबसे ज्यादा मामले: वर्ष 2023-24 में दर्ज
- मुख्य कारण: ऑनलाइन भुगतान धोखाधड़ी में बढ़ोतरी
सरकार के अनुसार, 2025-26 में डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के 5,997 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 35.86 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। मामलों में आई कमी का एक कारण धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के नियमों में बदलाव भी माना जा रहा है।
RBI के नए नियमों से रिपोर्टिंग में बदलाव
RBI ने जुलाई 2024 में Fraud Risk Management से जुड़े नए नियम जारी किए थे। इसके तहत बैंकों को केवल उन्हीं डिजिटल धोखाधड़ी मामलों की जानकारी देनी होती है, जिन्हें बैंक स्तर पर धोखाधड़ी के रूप में तय किया गया हो। इससे रिपोर्ट किए जाने वाले मामलों की संख्या में बदलाव आया।
डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए RBI, NPCI और अन्य एजेंसियों की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। बैंकों के लिए डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं। इसके अलावा संदिग्ध खातों की पहचान करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
⚠️ ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपाय
- सावधानी: अनजान लिंक और संदिग्ध कॉल से बचें
- सुरक्षा: OTP और बैंक जानकारी साझा न करें
- शिकायत: 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत जानकारी दें
- तकनीक: संदिग्ध खातों की पहचान के लिए नए सिस्टम का इस्तेमाल
- जागरूकता: सुरक्षित डिजिटल भुगतान की जानकारी रखें
धोखाधड़ी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाले मनी म्यूल खातों पर रोक लगाने के लिए RBI ने नवंबर 2024 में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद बैंकों की मदद के लिए MuleHunter.AI नाम का सिस्टम भी शुरू किया गया, जिससे संदिग्ध खातों की पहचान करने में सहायता मिलती है।
डिजिटल भुगतान सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
NPCI ने भी डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। इनमें डिवाइस की पहचान, अतिरिक्त सुरक्षा जांच, लेनदेन की सीमा और तुरंत धोखाधड़ी पहचानने वाली तकनीक शामिल हैं।
इसके अलावा साइबर अपराध की शिकायतों के लिए सरकार ने National Cybercrime Reporting Portal और 1930 हेल्पलाइन शुरू की है। लोग ऑनलाइन ठगी या संदिग्ध लेनदेन की शिकायत यहां दर्ज करा सकते हैं।
सरकार डिजिटल सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए कई अभियान भी चला रही है। RBI की Financial Literacy Week और “RBI Kehta Hai” जैसे अभियान के माध्यम से लोगों को सुरक्षित बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बारे में जानकारी दी जा रही है।
बढ़ते डिजिटल लेनदेन के दौर में लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, OTP साझा करने या संदिग्ध कॉल पर जानकारी देने से बचना जरूरी है, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षित रहा जा सके।
डिस्क्लेमर: डिजिटल भुगतान करते समय हमेशा सावधानी बरतें और अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखें।
