IPO से कंपनियों ने जुटाए 1.9 लाख करोड़ रुपये

भारतीय कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026 में IPO के जरिए करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस दौरान 360 से ज्यादा कंपनियों ने अपना IPO पेश किया और भारत दुनिया के सबसे सक्रिय प्राथमिक बाजारों में शामिल रहा। हालांकि, बाजार में निवेशकों का रुख पहले की तुलना में अधिक सावधान दिखाई दिया है।

IPO बाजार में निवेशकों का बदलता रुख

Grant Thornton Bharat की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय कंपनियों ने अच्छी मात्रा में पूंजी जुटाई। लेकिन अब निवेशक केवल नाम और लोकप्रियता के आधार पर निवेश करने के बजाय कंपनी की मजबूती, प्रबंधन की गुणवत्ता और भविष्य की कमाई की संभावना को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

वित्त वर्ष 2026 में Mainboard IPO की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। कुल 109 कंपनियों ने Mainboard के जरिए लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2025 में 80 कंपनियों ने करीब 1.63 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में दुनिया भर में हुई IPO listings में भारत की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही और चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर रहा।

📈 भारत का IPO बाजार प्रदर्शन

  • कुल पूंजी: 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए
  • IPO संख्या: 360 से ज्यादा कंपनियां शामिल
  • Mainboard IPO: 109 कंपनियों ने 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए
  • वैश्विक स्थिति: IPO listings में भारत दूसरे स्थान पर रहा
  • मुख्य कारण: घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी

भारतीय बाजार को मजबूत घरेलू निवेशकों और बढ़ते निवेश आधार का फायदा मिला है। हालांकि, वैश्विक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रा में बदलाव का असर निवेशकों के फैसलों पर भी देखने को मिला।

IPO में OFS और नई पूंजी जुटाने का रुझान

रिपोर्ट के अनुसार, Mainboard IPO में Offer for Sale (OFS) का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा। कुल राशि में OFS की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत रही, जबकि नई पूंजी जुटाने वाले हिस्से की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां विकास के लिए नई पूंजी जुटाने पर धीरे-धीरे ध्यान बढ़ा रही हैं।

निवेशकों के बदलते व्यवहार का असर IPO के प्रदर्शन में भी दिखा। वित्त वर्ष 2026 में IPO का औसत oversubscription घटकर 39 गुना रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 71 गुना था। इससे पता चलता है कि निवेशक अब कंपनी के मूल्यांकन, पारदर्शिता और कारोबार की गुणवत्ता को ज्यादा ध्यान से जांच रहे हैं।

💼 निवेशकों की नई रणनीति

  • ध्यान: कंपनी की मजबूती और भविष्य की कमाई पर जोर
  • Oversubscription: IPO मांग 39 गुना तक सीमित रही
  • Listing Gain: औसत लाभ घटकर करीब 7 प्रतिशत रहा
  • जरूरी जांच: मूल्यांकन और पारदर्शिता को महत्व दिया जा रहा है
  • फैसला: सोच-समझकर निवेश करना जरूरी

लिस्टिंग के दिन मिलने वाला औसत लाभ भी कम हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में औसत listing gain करीब 7 प्रतिशत रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 29 प्रतिशत था। वहीं, सूचीबद्ध IPO कंपनियों का औसत वार्षिक प्रदर्शन नकारात्मक 17 प्रतिशत रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, आज के समय में किसी कंपनी की सफलता केवल IPO लाने तक सीमित नहीं है। कंपनी को निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहतर प्रबंधन, सही रणनीति और मजबूत आधार की जरूरत होती है।

SME IPO में भी दिखी मजबूत गतिविधि

SME IPO के मामले में भी वित्त वर्ष 2026 मजबूत रहा। इस दौरान 258 SME IPO के जरिए 12,030 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 2025 में 242 SME IPO से 9,900 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।

आने वाले समय में भारत का IPO बाजार मजबूत बने रहने की उम्मीद है। बढ़ती घरेलू भागीदारी और आर्थिक विकास के कारण कई कंपनियां सार्वजनिक बाजार में आने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, निवेशकों के लिए कंपनी के मूल आधार और वित्तीय स्थिति को समझकर फैसला लेना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

Disclaimer: IPO में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, निवेश से पहले कंपनी की जानकारी जरूर जांचें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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