मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा है कि देश का कार उद्योग वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़कर 61 से 63 लाख वाहनों तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी कारों की बिक्री में तेजी देखने को मिल सकती है। उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों की तुलना में छोटे वाहनों का बाजार अब अधिक तेजी से बढ़ने की संभावना है।
2030-31 तक कार बाजार में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद
भार्गव ने कहा कि जीएसटी में किए गए बदलावों के बाद देश की अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी से जुड़े बदलावों ने केवल वाहन उद्योग ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्रों को भी नई गति देने में मदद की है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 मारुति सुजुकी के लिए अब तक का सबसे अच्छा साल रहा। कंपनी ने इस दौरान 24.22 लाख वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री की। कंपनी का निर्यात भी रिकॉर्ड 4.47 लाख वाहनों तक पहुंचा। इस अवधि में 23.4 लाख वाहनों का उत्पादन हुआ और कुल आय 1.83 लाख करोड़ रुपये रही। कंपनी का वार्षिक मुनाफा भी 14,445.4 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
भार्गव के अनुसार 22 सितंबर 2025 से नई जीएसटी दरें लागू होने के बाद पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कंपनी की खुदरा बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी। मार्च के अंत में कंपनी के पास करीब 1.9 लाख वाहनों की बुकिंग लंबित थी। इसकी एक वजह यह रही कि जिन मॉडलों की मांग ज्यादा थी, उनकी उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं थी। पिछले कुछ वर्षों में छोटी कारों की घटती मांग और एसयूवी की बढ़ती लोकप्रियता के अनुसार कंपनी ने अपने उत्पादन में बदलाव किए थे।
मारुति सुजुकी के प्रमुख आंकड़े
- FY 2025-26 बिक्री: 24.22 लाख वाहन
- निर्यात: 4.47 लाख वाहन
- उत्पादन: 23.4 लाख वाहन
- कुल आय: 1.83 लाख करोड़ रुपये
- वार्षिक मुनाफा: 14,445.4 करोड़ रुपये
- लंबित बुकिंग: करीब 1.9 लाख वाहन
उत्पादन व्यवस्था में हो रहा बदलाव
कंपनी अब अपनी उत्पादन व्यवस्था में बदलाव कर रही है। नई उत्पादन इकाइयों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि जरूरत के अनुसार अलग-अलग मॉडल और वाहन तैयार किए जा सकें। इसका असर अब दिखाई देने लगा है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मारुति की बिक्री 38 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पूरे वाहन उद्योग की बिक्री में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
छोटी कारों की बिक्री में भी सुधार देखने को मिला है। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इन वाहनों की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसमें 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कंपनी का मानना है कि ग्राहकों की जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में वाहन उपलब्ध होने से छोटी कारों की बिक्री को और मजबूती मिल सकती है।
भार्गव ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ने की बड़ी क्षमता है और सरकार लगातार मजबूत आर्थिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार देश के विकसित अर्थव्यवस्था बनने के साथ वाहन उद्योग की भूमिका भी बढ़ेगी, क्योंकि सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि वाहन उद्योग को पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना होगा।
नेट जीरो लक्ष्य के लिए बायोगैस पर जोर
देश के नेट जीरो लक्ष्य को लेकर भार्गव ने कहा कि भारत को अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से बड़ी मात्रा में बायोगैस तैयार की जा सकती है। इससे आयातित सीएनजी पर निर्भरता कम हो सकती है और स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प बढ़ सकता है। इससे कुछ अन्य उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं।
मारुति सुजुकी के बोर्ड ने पहले चरण में चार बायोगैस संयंत्र लगाने की मंजूरी दी है। इन संयंत्रों पर करीब 561 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कंपनी को उम्मीद है कि शुरुआती अनुभव और तकनीकी जानकारी मिलने के बाद इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश किया जा सकता है। भार्गव के अनुसार इससे स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के साथ सीएनजी और बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
मारुति की भविष्य की प्रमुख योजनाएं
- 2030-31 तक कार बाजार: 61 से 63 लाख वाहन
- छोटी कार बिक्री: पहली तिमाही में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी
- बायोगैस संयंत्र: पहले चरण में चार
- बायोगैस संयंत्र निवेश: करीब 561 करोड़ रुपये
- ग्रामीण विस्तार: बिक्री, सर्विस और स्पेयर पार्ट्स केंद्रों पर जोर
ग्रामीण क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने की तैयारी
कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। भार्गव ने बताया कि गांवों और छोटे शहरों में कारों की बिक्री शहरी इलाकों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनी बिक्री, सर्विस और स्पेयर पार्ट्स से जुड़े केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है, ताकि ग्रामीण ग्राहकों को बेहतर सुविधा मिल सके।
भार्गव ने केंद्र और राज्य सरकारों से सुधारों की प्रक्रिया को और तेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार और देरी कम की जा सकती है। समय की बचत से उत्पादन लागत भी घट सकती है।
उन्होंने निजी क्षेत्र पर भरोसा बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की जरूरत बताई। भार्गव का कहना है कि तेजी से संपत्ति और रोजगार के अवसर पैदा करना देश की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से ऐसे सुधारों और योजनाओं का समर्थन करने की अपील की, जिनसे आर्थिक विकास बढ़े और अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल समाज को अधिक समान और न्यायपूर्ण बनाने के लिए किया जा सके।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

