नरी कांट्रैक्टर को टाटा ने दिया सहारा, चोट के बाद बदली जिंदगी

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नरी कांट्रैक्टर की कहानी सिर्फ मैदान पर उनके संघर्ष की नहीं है, बल्कि यह भी बताती है कि मुश्किल समय में किसी संस्था का साथ किसी व्यक्ति की जिंदगी को किस तरह बदल सकता है। वर्ष 1962 में वेस्टइंडीज दौरे के दौरान सिर में लगी गंभीर चोट ने उनके खेल करियर को अचानक रोक दिया था। उस समय उनकी उम्र काफी कम थी और वह भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। इस हादसे के बाद टेल्को, जिसे आज टाटा मोटर्स के नाम से जाना जाता है, ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

🏏 नरी कांट्रैक्टर की जिंदगी बदलने वाला हादसा

  • वर्ष: 1962
  • दौरा: वेस्टइंडीज
  • चोट: सिर के पिछले हिस्से पर गंभीर चोट
  • उम्र: 28 वर्ष
  • इलाज: कई जटिल ऑपरेशन
  • विशेष उपचार: सिर में टाइटेनियम की प्लेट लगाई गई
  • सहयोग: टेल्को और टाटा समूह

वेस्टइंडीज दौरे में लगी थी गंभीर चोट

मार्च 1962 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मुकाबले के दौरान तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफिथ की गेंद नरी कांट्रैक्टर के सिर के पिछले हिस्से पर जा लगी। यह चोट इतनी गंभीर थी कि उनकी जान तक खतरे में पड़ गई थी। उनकी हालत को देखते हुए डॉक्टरों को कई जटिल ऑपरेशन करने पड़े। उनकी सुरक्षा के लिए सिर में टाइटेनियम की प्लेट भी लगाई गई। इस घटना के बाद महज 28 वर्ष की उम्र में उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर समाप्त हो गया।

करियर अचानक खत्म होने के बाद नरी कांट्रैक्टर के सामने भविष्य को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई थी। ऐसे समय में टाटा समूह ने उनका साथ दिया। उस समय समूह की जिम्मेदारी जेआरडी टाटा के पास थी। कंपनी ने उनके इलाज का खर्च उठाया और उन्हें नौकरी भी दी। उन्हें कंपनी में एक सम्मानित कार्यकारी अधिकारी का पद दिया गया। यह फैसला उस दौर में काफी महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि इससे नरी को अपने जीवन को दोबारा संभालने का अवसर मिला।

इलाज के बाद मैदान पर फिर की वापसी

इलाज के बाद नरी कांट्रैक्टर ने हिम्मत नहीं छोड़ी। सिर में धातु की प्लेट होने के बावजूद उन्होंने मैदान पर वापसी की। उन्होंने टाटा स्पोर्ट्स क्लब की कप्तानी संभाली और लंबे समय तक घरेलू स्तर पर खेलते रहे। उन्होंने 1970-71 तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला। चोट के बाद मैदान पर उनकी वापसी उनके मजबूत इरादे और खेल के प्रति लगाव को दिखाती है।

🤝 मुश्किल समय में टाटा समूह का साथ

  • इलाज: कंपनी ने इलाज का खर्च उठाया
  • रोजगार: कंपनी में सम्मानित कार्यकारी अधिकारी का पद दिया
  • खेल: टाटा स्पोर्ट्स क्लब की कप्तानी संभाली
  • वापसी: चोट के बाद घरेलू क्रिकेट में मैदान पर लौटे
  • प्रथम श्रेणी क्रिकेट: 1970-71 तक खेलते रहे
  • सहयोग: रोजगार और सम्मान के साथ जीवन दोबारा संभालने का अवसर मिला

नरी कांट्रैक्टर और टाटा समूह का यह रिश्ता सिर्फ नौकरी देने तक सीमित नहीं था। मुश्किल समय में कंपनी ने इलाज, रोजगार और सम्मान देकर उनका साथ दिया। इसी वजह से यह घटना खेल जगत के साथ-साथ corporate दुनिया में भी मानवीय सोच की मिसाल के रूप में याद की जाती है।

कठिन दौर में बनी प्रेरणा की कहानी

आज नरी कांट्रैक्टर की कहानी खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है। एक गंभीर चोट ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को जरूर खत्म कर दिया, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को रुकने नहीं दिया। टाटा समूह के सहयोग से उन्होंने खेल से जुड़े अपने सफर को आगे बढ़ाया और मैदान पर दोबारा लौटे। उनकी कहानी बताती है कि सही समय पर मिला सहयोग किसी व्यक्ति को कठिन दौर से बाहर निकलने की ताकत दे सकता है।

इस पूरे सफर में cricket, executive, first-class और CSR जैसे शब्द ही सीमित रूप से इस्तेमाल किए गए हैं, ताकि खबर का अर्थ स्पष्ट रहे और भाषा अनावश्यक रूप से अंग्रेजी शब्दों से भरी न लगे।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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